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Tuesday, December 26, 2017

एकात्म यात्रा- मैं और तुम के भेद को समाप्त करने का यह आध्यात्मिक प्रयास है

कटनी /  बरही पहुंची एकात्म यात्रा का उत्साह और उमंग के साथ स्वागत बरही वासियों ने किया। यात्रा के अभिनन्दन के लिये जनसैलाब उमड़ पड़ा। जगह-जगह यात्रा का अभिनन्दन और चरणपादुका का पूजन स्थानीयजनों द्वारा किया गया। बरही में एकात्म यात्रा में प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री संजय सत्येन्द्र पाठक भी शामिल हुये। उन्होने भी चरण पादुका का पूजन कर ध्वज थामा।
स्थानीय राम मंदिर परिसर में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें पूज्यनीय संत ब्रम्हानन्द दास जी महाराज, मुख्य क्क्ता डॉ कुष्णकान्त चतुर्वेदी ने अपने विचार रखे। प्रारंभ में यात्रा की रुपरेखा के विषय में अमरकंटक से प्रारंभ हुई एकात्म यात्रा के सह संयोजक  शिव नारायण पटेल ने विस्तार से जानकारी दी।
जन संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रम्हानन्द महाराज जी ने कहा कि एकात्म यात्रा का उद्देश्य अद्वेतवाद् है। एकात्म और अद्वैत एक दूसरे के पूरक हैं। इसके मूल में एकौ ब्रम्ह द्वितीयो नास्ति की संकल्पना है। इस यात्रा के माध्यम से मैं और तुम के भेद को समाप्त करने का यह राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया आध्यात्मिक प्रयास है। वास्तविक में यही अद्वैतवाद् है। जिसकी संकल्पना आदिगुरु शंकराचार्य जी ने दी है।
वहीं यात्रा के मुख्य वक्ता डॉ कुष्णकान्त चतुर्वेदी ने एकात्म यात्रा को सामान्य नहीं विलक्षण यात्रा बताया। उन्होने आदिगुरु शंकराचार्य के जीवन पर प्रकाश डाला। साथ ही विभिन्न वृतान्त भी बताये। उन्होने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य ने कम उम्र में चार वेद, सारे शास्त्र पढ़े। जिस उम्र में बच्चे खेलना नहीं भूलते हैं, उस उम्र में उन्होने राष्ट्र के मानक स्थापित किये। चारो धाम बनाये। संसार के सारे दार्शनिक संतों में जगतगुरु शंकराचार्य सबसे लोकप्रिय संत हैं।
जनसंवाद कार्यक्रम में शामिल हुये पूज्यनीय संत समाज का अभार प्रदर्शन राज्यमंत्री संजय सत्येन्द्र पाठक ने किया। उन्होने कहा कि संतों की शरण में हम सबको बैठने का अवसर मिला, यह हम सबका सौभाग्य है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत की तर्ज पर सम्पूर्ण कुरुतियां दूर हों, समाज और जाति भेद मिटे, हम सभी एक सूत्र में बंधें, यही उद्वेश्य एकात्म यात्रा का है। जिसमें हम सबको अपनी सहभागिता करनी चाहिये। राज्य सरकार ने एैसे आदिगुरु शंकराचार्य जिन्होने एकात्म अद्वैत का सिद्धान्त दिया। चारों मठों की स्थापना की। उनके गुरु उन्हें मध्यप्रदेश में मिले। उस स्थान पर आदिगुरु शंकराचार्य जी की विशाल प्रतिमा स्थापित हो, इसमें जनसहभागिता हो, इसलिय धातु संग्रहण के माध्यम से जनजागरुकता का यह अभियान चलाया है। राज्यमंत्री  ने उपस्थित जनमानस को इस अभियपन में जुड़ते हुये अपनी सक्रिय सहभागिता के लिये प्रेरित भी किया।


इस अवसर पर प्रदेश की समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती पद्मा शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ममता पटेल, बरही नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती तिवारी सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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