10/1/12 - 11/1/12 - प्रबल सृष्टि - मध्य प्रदेश के कटनी जिले का समाचार पत्र

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अज्ञानता अंधकार की निशानी है - ज्ञान उजाले का - कटनी जिले का समाचार पत्र - संपादक - मुरली पृथ्यानी

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Saturday, October 20, 2012

भारत के हर नागरिक का होगा " आधार "

October 20, 2012 1

देश के प्रत्येक नागरिक को भारत सरकार एक विशिष्ठ पहचान पत्र आधार उपलब्ध करा रही है , इस पहचान पत्र के जरिये सरकार अब प्रत्येक नागरिक तक उनसे जुडी योजनाये पहुचाई जाएँगी , नागरिको को सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी अब इस आधार कार्ड के जरिये उनतक सीधे पहुचेगी , यह आधार कोई पहचान  पत्र भर नहीं है बल्कि यह नागरिको का आधार बन जाएगी , पाठको के लिए आधार कार्ड से जुडी  जानकारी यहाँ उपलब्ध कराई जा रही है 

आधार क्या हैः-

आधार 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) सभी निवासियों के लिये जारी करेगा। संख्या को केन्द्रीकृत डाटा बेस में संग्रहित किया जायेगा एवं प्रत्येक व्यक्ति की आधारभूत जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक सूचना - फोटोग्राफ, दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि के साथ लिंक किया जायेगा।


आधार होगा:
किफायती तरीके व सरलता से ऑनलाइन विधि से सत्यापन योग्य।
सरकारी एवं निजी डाटाबेस में से डुप्लिकेट एवं नकली पहचान को बड़ी संख्या में समाप्त करने में अनूठा एवं पर्याप्त क्षमता युक्त।
एक क्रम-रहित(रेन्डम) उत्पन्न संख्या, किसी भी जाति, पंथ, मजहब एवं भौगोलिक क्षेत्र आदि के वर्गीकरण पर आधारित नहीं हैं।
आधार क्यों?
आधार आधारित पहचान की दो अद्वितीय विशेषतायें होंगी:-
सार्वभौमिकता, यह सुनिश्चित है कि आधार को समय के साथ देश भर में सेवा प्रदाताओं द्वारा मान्य एवं स्वीकार किया जायेगा।
प्रत्येक निवासी आधार संख्या हेतु पात्रता रखता है।
संख्या के फलस्वरूप सार्वभौमिक पहचान अवसंरचना निर्मित होगी जिस पर देश भर में पंजीयक एवं एजेंसी उनकी पहचान आधारित अनुप्रयोगों का निर्माण कर सकते हैं।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, (भा.वि.प.प्रा.) आधार संख्या हेतु निवासियों को नामांकित करने के लिये देश भर के विभिन्न पंजीयकों के साथ साझेदारी करेगा, ऐसे पंजीयक राज्य सरकारों, राज्य- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, बैंक, टेलीकॉम कंपनियों इत्यादि को शामिल कर सकते हैं। ये पंजीयक आगे निवासियों को आधार में नामांकित करने हेतु नामांकन एजेंसियों के साथ भागीदारी कर सकते हैं।
आधार सरकारी व निजी एजेंसियों एवं निवासियों के मध्य विश्वास में वृद्धि सुनिश्चित करेगा। एक बार निवासियों का आधार के लिये नामांकन होते ही सेवा प्रदाता को सेवा प्रदान करने से पहले के.वाई.आर. संबंघी दस्तावेजों की जांच जैसी समस्या का सामना नहीं करना होगा। वे अब निवासियों को बिना पहचान दस्तावेजों के सेवाए देने से इन्कार नहीं कर सकते हैं। निवासियों को भी बार- बार दस्तावेजों के माध्यम से पहचान उपलब्ध कराने की परेशानी नहीं होगी। जब भी वे कई सेवाओं जैसे बैंक में खाता खुलवाने, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की आवश्यकता महसूस करेंगे, आधार संख्या पर्याप्त होगी।
पहचान के स्पष्ट सबूत प्रदान कर, आधार, निर्धनों एवं दलितों को सेवाओं जैसे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तथा सरकारी एवं निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की कई अन्य सेवाओं का आसानी से उपयोग करने हेतु अवसर प्रदान कर सशक्त बनाता है। भा.वि.प.प्रा. का केन्द्रीयकृत प्रौद्योगिक अवसंरचना 'कभी भी, कहीं भी, किसी भी तरह'' प्रमाणीकरण को सक्षम करेगी। इस तरह आधार प्रवासियों को भी पहचान की गतिशीलता प्रदान करेगा। आधार प्रमाणीकरण सजीव ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन दोनों तरीके से किया जा सकता है। निवासियों को दूर से अपनी पहचान स्थापित करने हेतु सेलफोन/लैण्ड लाइन कनेक्शन सजीव प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करेगा। सजीव आधार से जुड़ा पहचान सत्यापन ग्रामीणों एवं निर्धनों को वैसा ही लचीलापन उपलब्ध करायेगा जिस तरह से शहरी धनी वर्तमान में अपनी पहचान सत्यापित करते हैं तथा सेवाओं जैसे कि बैंकिंग एवं अन्य का उपयोग करते हैं। आधार, नामांकन पूर्व उचित सत्यापन की भी मांग करता है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को इसमें सम्मिलित किया जाना सुनिश्चित है। भारत में, मौजूदा पहचान डाटाबेस नकली, धोखाधड़ी, डुप्लिकेट एवं छद्म हितग्राहियों की समस्या से भरा पड़ा है। आधार डाटाबेस में इन समस्याओं को रोकने के लिये भा.वि.प.प्रा. ने निवासियों को जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक जानकारियों के उचित सत्यापन के साथ अपने डाटाबेस में नामांकित करने की योजना बनाई है। जो यह सुनिश्चित करेगा कि संग्रहित आंकड़े कार्यक्रम के प्रारंभ से ही सही हैं। हालांकि अधिकतर दलित एवं निर्धन लोगों के पास पहचान संबंधी दस्तावेजों का अभाव रहता है और आधार उनको अपनी पहचान साबित करने का पहला रूप हो सकता है। भा.वि.प.प्रा. यह सुनिश्चित करेगा कि उसका अपने निवासी को जाने के.वाई.आर. का मानक निर्धनों के नामांकन में बाधा न बने इसके लिये परिचयदाता प्रणाली मानकों के अनुसार विकसित की गई है जिनके पास दस्तावेजों का अभाव है। इस प्रणाली के द्वारा अधिकृत व्यक्ति (परिचयदाता) जिसके पास पहले से ही आधार है, उन निवासियों का, जिनके पास कोई पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, परिचय दे सकता है ताकि वे अपना आधार प्राप्त कर सके ।
आधार कौन प्राप्त कर सकता है?
एक व्यक्ति जो कि एक भारतीय है एवं भा.वि.प.प्रा. द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता है, एक आधार प्राप्त कर सकता है।

आधार कैसे प्राप्त करें?:-
आधार प्राप्त करने की विधि-स्थानीय मीडिया द्वारा उपर्युक्त समय पर प्रचारित किया जायेगा, जिसके आधार पर निवासी निकट के नामांकन शिविर पर जाकर आधार हेतु पंजीयन करा सकते हैं। निवासियों को प्राथमिक तौर पर कुछ दस्तावेजों, जो कि मीडिया के विज्ञापनों में निर्देशित किया जायेगा को साथ लाना होगा।
आधार हेतु पंजीयन कराने के साथ ही निवासियों को दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि हेतु बायोमैट्रिक स्कैनिंग से गुजरना होगा। इसके बाद उनका फोटो लिया जायेगा एवं कार्य सम्पन्न होने के बाद एक नामांकन संख्या प्रदान किया जायेगा। नामांकन एजेंसी अनुसार निवासी को 20 से 30 दिनों के भीतर आधार संख्या जारी की जायेगी।
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Friday, October 05, 2012

सभ्य समाज के बीच में शराब के "अवैध अड्डे " आबकारी विभाग का संरक्षण, कलेक्टर की नहीं चल रही

October 05, 2012 0



                                                   नशा मुक्ति अभियान ढकोसला साबित  

कटनी ( मध्य प्रदेश  ) जिस जिले के मुखिया कलेक्टर के आदेश शराब ठेकेदार रद्दी की टोकरी में डाल दे , आबकारी विभाग खुद शराब को अवैध तरीके से बिकवाने में लगा हो , रेस्टोरेंट की आड़  में शराब के अवैध अड्डे पनप रहे हो . ऐसी  बातो से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस  जिले में बाकि तमाम नियम कायदों का क्या हश्र होता होगा . उधर  प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  कमिश्नरो कलेक्टरों को खड़े होने की हिदायत दे रहे है जिससे तमाम व्यवस्थाएं सुचारू रह सके तो इधर प्रशासन तरह तरह के माफिया के आगे नतमस्तक सा  नजर आ रहा है , अब अगर कोई खुद खड़ा होना ही नहीं चाहे  तो मुख्यमंत्री भला क्या करे ? प्रशासन की  लुल पुंज हो चली कार्यप्रणाली ने कटनी जिले में हर तरह के माफिया को मजबूत करने का प्रयास किया है इसका उदहारण फि़लहाल सिर्फ आबकारी विभाग और  इससे जुड़े शराब ठेकेदारों के व्यवसाय करने के उन तरीको से लिया जा सकता है जिससे नुकसान न सिर्फ वर्तमान सामाजिक परिद्रश्य पर ही पड़ता हुआ दिखाई देता है बल्कि इन्ही कारणों की वजह से भयानक और बदसूरत कल भी दिखाई देने लगता है 

 वन्शरूप  वार्ड बरगवां  स्थित   गड्डा टोला के लिए आवंटित हुई   देसी शराब दुकान  को ठेकेदार  विकास दुबे ने  सार्वजनिक हितो को ताक में रखते हुए  मुख्य मार्ग पर स्थापित कर रखी है ,वैसे तो कलेक्टर ए के सिंह ने 26 जून 2012 को  15 दिनों के अन्दर  दुकान गड्डा टोला की निर्धारित सीमा में  स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया था  लेकिन ठेकेदार ने अपनी मन मर्जी जारी रखते हुए  दुकान नहीं हटाई . इसे लेकर  सितम्बर माह में स्थानीय पार्षदों और नागरिको ने एक हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र भी  कलेक्टर  को सौंपा  है  लेकिन स्थिति अभी भी यथावत है . सूत्रों की माने तो खुद आबकारी विभाग ही ठेकेदार के साथ है ऐसे में जिला कलेक्टर के आदेश एक प्रकार से रद्दी की टोकरी में डले हुए दिखाई दे रहे है . महीनो तक अगर जिले के मुखिया कलेक्टर के आदेश पर कार्यवाही न हो सके तो इसे उचित को हरगिज नहीं कहा जा सकता

आबकारी विभाग के संरक्षण में  शराब के  अवैध अड्डे 

राष्ट्रीय राजमार्ग बरगवां स्थित राय दरबार , झिन्झरी स्थित मुरली ढाबा ,जायका रेस्टोरेंट ,भास्कर ढाबा में रोजाना करीब 50 हजार रुपये से ज्यादा की  शराब अवैध रूप से बेचीं और पिलाई जा रही है , माधव नगर , बरगवां , खिरहनी में अंग्रेजी शराब  दुकान चलाने वाले जबलपुर के सिंडिकेट ठेकेदार शिवहरे की माधव नगर स्थित दुकान से शराब यहाँ  पहुंचाई  जाती है , हर माह  आबकारी  विभाग  प्रायोजित तरीके से मामूली प्रकरण अलग अलग नाम पर  बनाता है जिससे विभाग सहित अवैध दुकान , पेकारियां चलाने वाले भी बेफिक्र रहते है . सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग के अधिकारी  इसकी एवज में  एक मोटी रकम बदस्तूर  प्रतिमाह वसूलते  है अन्यथा क्या कारण है जो ऐसे अड्डे आराम से संचालित किये जा रहे है  

माधव नगर में ही दर्जनों शराब के अवैध अड्डे आबाद 

बंगला लाइन में परसराम मन्नुमल  दाल मिल के सामने ,हरिजन मोहल्ला , अमीर गंज , गाँधी मार्केट , गुल्लू की होटल ,  हाऊसिंग बोर्ड में  खुद मुरली ढाबे वाले के घर के पास आदि इत्यादि ऐसी दर्जनों जगह है जहा शराब पीने की सुविधा आराम से मिल जाएगी . आबकारी और पुलिस विभाग की दरियादिली ऐसे अड्डो के इजाफे की मददगार साबित हो रही है . ध्यान देने वाली बात यह  है कि ऐसी जगहों पर पीने वालो में  रोजाना कमा कर खाने वालो की संख्या ही ज्यादा रहती है रोजाना कमाने वाले ऐसे अवैध अड्डो में अपनी दिन भर की कमाई नशे की आदत के चलते उड़ा आते है या यूँ कहे  कि आस पास ज्यादा स्थानों की सुलभता होने के कारण भी पीने का शौंक पनप रहा है .सभ्य समाज जिम्मेदार विभागों के इस रवैये से हैरान भी है , इससे पहले की हर गली मोहल्ला शराब के अड्डो में तब्दील हो जाये और इसकी वजह से सब बदसूरत सा हो जाये जिला प्रशासन  और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियो को इस और ध्यान देकर अविलंभ कार्यवाही करनी चाहिए जिससे नागरिको के मन में कानून का सम्मान बना रह सके  
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