कटनी (मुरली पृथ्यानी) सिंधी समाज का ऐसा कोई घर नही होगा जहां लोकप्रिय लजीज गीचा पापड़ (चावल), पापड़ (दाल) डोणा (कचरी), जलेबी (चावल की) जलेबी (पोहा), साबूदाना (पापड़) मुठ्या (गेहूं आटा) सतपुड़ा, साटा नानखटाई, माजुन, टमाटर अचार आदि बड़े चाव से हर कोई न खाता हो।
इनके बिना भोजन और मेहमाननवाजी अधूरी होती है इन्हें बड़े शौक और तन्मयता से घर की महिलाएं बनाती है ऐसी ही एक महिला हैं माधवनगर बंगला लाईन निवासी बबिता नैनवानी जो इन स्वादों को साधुराम स्कूल में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेले के माध्यम से सिंध के स्वाद के बैनर तले लेकर आईं हैं।
उनका कहना है सभी को सिंध का स्वाद जरूर चखना चाहिए यह शूद्ध रूप से निर्मित होते हैं। आज समाज की बहुत सी महिलाएं स्वावलंबी हैं जो मेहनत करती हैं इसलिए उनकी मेहनत को सराहा जाना चाहिए और जिन घरों में समय अभाव के चलते यह स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ नही बनाए जाते हैं वह इनसे माधवनगर में जरूर ले सकते हैं आखिर बात सिंध के स्वाद की है।

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