कटनी ( मुरली पृथ्यानी ) दीपावली के दूसरे दिन 25 अक्टूबर को हरे माधव दरबार में पहुँचे भक्तों के चेहरे खिलें हुए हैं सामने सदगुरु साईं ईश्वरशाह स्टेज पर विराजमान हैं।
स्टेज से जो गीत गाए जा रहे हैं भक्त खुद को उसके एक एक शब्द में शामिल पा रहे हैं और भक्ति रस में डूबे हुए दिखाई देतें हैं। आसपास जहां भी नजर जा रही बस मौज बरस रही लगती है इसका मुख्य कारण है सामने सदगुरु विराजमान हैं जो स्वयं अपने कर कमलों से भक्तों के लिए आज गक्कड़ भरता के रूप में प्रसाद बना रहे हैं। आज का दिन बहुत खास है भक्त स्टेज से आ रहे सुमधुर गीतों का आनंद ले रहें है और नजर सिर्फ सदगुरु साईं पर टिकी हुई है। वे रह रह कर स्टेज से नीचे आते और धुएं के बीच जाकर गक्कड़ पर घी डालते। ऊपर से देखने पर भले ही यह सामान्य सा लग रहा हो लेकिन इस कौतूहल के पीछे जो भक्त की भलाई के राज छिपे होतें हैं वह स्वयं सिर्फ सदगुरु ही जानते हैं।
फिर स्टेज से आवाज आती है कि संगत आपस में 13 - 13 की संख्या में गोलाकार होकर बैठ जाए क्योंकि अब सदगुरु के सामने प्रीति भोज भक्तों को मिलने जा रहा है। असंख्य भक्त अपने अपने घरों से टिफिन लाते है और यही आपस में मिल बैठकर अपना मुख पवित्र करते हैं। कहते हैं दाने दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम बस यही चरितार्थ सा होता दिखता है। अब सभी भक्त मिल बैठकर प्रीति भोज का आनंद ले रहे हैं और सदगुरु साईं ईश्वरशाह एक एक भक्त पर रहमत भरी नजर डाल रहें हैं। वे भक्तों की खुशी में खुश हैं और भक्त उनके दर्शन और सानिध्य पाकर निहाल हैं, बस यही आनंद और प्रेम का सागर सा लग रहा है। सदगुरु यही बताते हैं परमात्मा चैतन्य और आनंदस्वरूप है और यह आनंद भीतर तभी आता है जब मन में सदगुरु के प्रति सच्चा प्रेम हो और उनके उपदेशों के प्रति चलना आए।

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