ब्रिटिश कंपनी की जहरीली विरासत पर हाईकोर्ट सख्त - कैमोर में 10 लाख टन एस्बेस्टस युक्त जहरीले कचरे का मामला, हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में; केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी
कटनी, (प्रबल सृष्टि) मध्यप्रदेश के कटनी जिले के कैमोर नगर में दशकों से फैले एस्बेस्टस (खतरनाक रेशेदार खनिज) युक्त औद्योगिक कचरे और उससे उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य संकट को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। माननीय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने इस गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि ब्रिटिश कंपनी टर्नर एंड न्यूऑल पीएलसी द्वारा वर्ष 1934 में कैमोर में स्थापित एस्बेस्टस फैक्ट्री से निकले खतरनाक अपशिष्ट का वर्षों तक आसपास के क्षेत्रों में निस्तारण किया गया। इसके परिणामस्वरूप कैमोर के आवासीय इलाकों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य क्षेत्रों में एस्बेस्टस युक्त कचरे के मौजूद होने की गंभीर आशंका है। याचिका के अनुसार, औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न इस जहरीली विरासत का दुष्प्रभाव आज भी स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ रहा है।
एक लाख नहीं, लगभग 10 लाख टन जहरीले कचरे का खतरा
याचिका में प्रस्तुत पर्यावरणीय अध्ययन एवं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया है कि कैमोर के आसपास लगभग 10 लाख टन एस्बेस्टस से दूषित मिट्टी होने का अनुमान सामने आया है। कनाडाई पर्यावरणीय संस्था ईसीओएच (ECOH) की रिपोर्ट में भी लगभग 10 लाख टन दूषित सतही मिट्टी का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न रिपोर्टों में लगभग 5.65 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में एस्बेस्टस प्रदूषण तथा हजारों लोगों के इसके संपर्क में आने की आशंका जताई गई है।
एस्बेस्टस के अत्यंत सूक्ष्म रेशे हवा के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके संपर्क में आने से एस्बेस्टोसिस, फेफड़ों का कैंसर तथा मेसोथेलियोमा जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। सबसे गंभीर चिंता यह है कि यह प्रदूषण केवल फैक्ट्री परिसर तक सीमित नहीं बताया गया है, बल्कि इसके आसपास रहने वाली आबादी, बच्चों और आम नागरिकों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
हजारों लोग बीमारी की चपेट में, मेडिकल रिकॉर्ड भी याचिका का हिस्सा
याचिका में विभिन्न चिकित्सा शिविरों, जांच रिपोर्टों और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया गया है कि कैमोर में एस्बेस्टस जनित बीमारियों से प्रभावित लोगों की पहचान की गई है। वर्ष 2013 से मेडिकल कैंपों के माध्यम से ऐसे मरीजों की जांच की जा रही है। याचिका में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, सैकड़ों प्रभावित व्यक्तियों के मेडिकल रिकॉर्ड और बीमारी से संबंधित मुआवजे के दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। इन सभी रिकॉर्डों की सक्षम अधिकारियों से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दशकों से इस औद्योगिक गतिविधि का दुष्परिणाम स्थानीय नागरिक भुगत रहे हैं, लेकिन आज तक पूरे क्षेत्र में दूषित कचरे की वैज्ञानिक पहचान, सुरक्षित निस्तारण और प्रभावित लोगों के समुचित पुनर्वास एवं उपचार के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी है।
हाईकोर्ट में उठाई गईं ये प्रमुख मांगें
जनहित याचिका में न्यायालय से मांग की गई है कि कैमोर एवं आसपास के क्षेत्रों में एस्बेस्टस प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए स्वतंत्र एवं व्यापक वैज्ञानिक जांच कराई जाए। इसके अंतर्गत मिट्टी, हवा तथा अन्य प्रभावित स्थानों के नमूनों की जांच कराई जाए और यह निर्धारित किया जाए कि कितना क्षेत्र प्रदूषित है तथा वर्तमान में नागरिकों के स्वास्थ्य पर कितना खतरा बना हुआ है।
इसके साथ ही प्रभावित एवं पूर्व कर्मचारियों सहित स्थानीय निवासियों की व्यापक स्वास्थ्य जांच, बीमार व्यक्तियों की पहचान, समुचित चिकित्सा सुविधा, उपचार, पुनर्वास तथा कानून के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्रदूषण के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार संस्थाओं की पहचान कराई जाए तथा यदि एस्बेस्टस प्रदूषण की पुष्टि होती है तो दूषित कचरे के सुरक्षित निष्कासन, परिवहन, निस्तारण एवं वैज्ञानिक तरीके से पर्यावरणीय पुनर्स्थापन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।
ब्रिटिश कंपनी के बाद बदले स्वामित्व, लेकिन प्रदूषण की जिम्मेदारी का सवाल बरकरार
याचिका में टर्नर एंड न्यूऑल पीएलसी तथा बेल्जियम की कंपनी ईटेक्स (ETEX) से जुड़ी ऐतिहासिक औद्योगिक गतिविधियों और उनके बाद फैक्ट्री के स्वामित्व में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। वर्तमान में फैक्ट्री एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्व में संचालित होने का उल्लेख करते हुए याचिका में यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया है कि ऐतिहासिक रूप से जमा हुए एस्बेस्टस अपशिष्ट की वास्तविक स्थिति क्या है और उसके सुरक्षित निस्तारण तथा प्रभावित नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि कंपनी के स्वामित्व में बदलाव होने मात्र से स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े गंभीर प्रश्न समाप्त नहीं हो जाते। संबंधित सरकारी एवं पर्यावरणीय प्राधिकरणों को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
यह जनहित याचिका समाजसेवी आशुतोष दीक्षित मनु एवं केमोर निवासी गणेश राव द्वारा दायर की गई है।
याचिका में कैमोर के नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आर्यन उर्मलिया ने पैरवी की। दिनांक 5 नवंबर 2026 को माननीय हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब केंद्र एवं राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षकारों को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।

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