कटनी (प्रबल सृष्टि) नगर निगम क्षेत्र में व्याप्त जनसमस्याओं, निर्माण कार्यों में अनियमितताओं, वर्षों से लंबित योजनाओं, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं तथा मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति के विरोध में मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा नगर निगम कटनी के सामने अनूठा प्रदर्शन करते हुए विशाल महाघेराव किया गया। महाघेराव का नेतृत्व प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष यश लखन घनघोरिया ने किया एवं कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश युवा कांग्रेस सचिव दिव्यांशु मिश्रा अंशु एवं जिला अध्यक्ष मोहम्मद इसराइल ने किया। हजारों की संख्या में युवा कार्यकर्ता एवं आम नागरिक रैली के रूप में नगर निगम पहुंचे एवं “चार साल कटनी शहर बदहाल” के नारे के साथ भाजपा महापौर के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की। नगर निगम के सामने पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप नकली नोटों की गड्डियों से भरा सूटकेस नगर सरकार को सौंपा और भ्रष्टाचार एवं कमीशनखोरी के आरोप जड़े, वहीं जल सप्लाई दोनों टाइम की मांग पर महिला कार्यकर्ताओं ने मटके फोड़कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन...
गुरु अपने शरीर से नहीं जोड़ता - ब्रह्म ज्योति देह के बीच बोले, ब्रह्म दर्शन ही प्रभु के दर्शन हैं, ब्रह्म दर्शन ही सतगुरु के दर्शन हैं, संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में पटियाला पंजाब से पधारे केंद्रीय ज्ञान प्रचारक महात्मा विजय धीर जी ने विचार व्यक्त किए
कटनी ( मुरली पृथ्यानी ) करने वाला ये आप होता है समझ लो इस बात को। हे निरंकारी मिशन वालों, समझ लो इस बात को। ये करने वाला स्वयं आप है। मैं नहीं हूं। यही है। जब मुझे ये समझ में आ गई बात, तो कर्ता का भाव मुझे छू नहीं पाएगा। कर्ता के भाव का आ जाना कि मैं कर रहा हूं, अज्ञानता की निशानी है। जो समझे महा मूर्ख, अज्ञानी है। इसको लगता है कि ये शरीर है, अज्ञानी है। मैं यहां बैठ के बोलता हूं, मैं नहीं बोल रहा। ये स्वयं मेरे से बुलवा रहा है। किसी को पता होता है। मैं कहां हूं बीच में? मैं तो है ही नहीं कहीं। मैं तो साधु हूं। थोड़ी देर पहले तबला बज रहा था। ढोल बज रहे थे। हारमोनियम बज रहा था। अब वही पड़े हैं, क्यों नहीं बोल रहे ये? अरे बजाने वाला उतर गया। धरे के धरे रह गए। मुझे कौन बजा रहा है? यही ब्रह्म है। मुझसे कौन बुलवा रहा है? यही ब्रह्म है। तो फिर मैं कहां हूं? यही तो ज्ञान है। गुरु, जब ये आ जाता है, तो अहम टूट जाता है। गुरु का ज्ञान सबसे पहले मेरे अहंकार पर चोट करता है। क्योंकि अहंकार ही है जो मेरे और गुरु के दरमियान बाधा बने हुए हैं। पहले प्रण में ही गुरु ने बोल दिया। अवतार, जब पां...