कटनी ( प्रबल सृष्टि ) - नगर की स्वच्छता एवं नागरिक सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के उद्देश्य से महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी ने बुधवार प्रातः प्रियदर्शिनी बस स्टैंड स्थित नाले , मुक्तिधाम रोड एवं माधव नगर कैंप क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इस दौरान महापौर श्रीमती सूरी स्वयं मौके पर खड़ी रहीं और नालियों की सफाई करवाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नाली कवरिंग कार्य के दौरान पर्याप्त संख्या में चैंबर बनाए जाएं , ताकि भविष्य में सफाई एवं रखरखाव कार्यों में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए नाले के ऊपर किए गए अतिक्रमण को हटाकर सुगम एवं निर्बाध जल निकासी सुनिश्चित की जाए। महापौर ने निर्देश दिए कि नाली सफाई एवं कवरिंग तोड़ने के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि दुकानों के सामने पर्याप्त स्थान छोड़ा जाए , जिससे आव...
सतगुरु देह का नाम नहीं है, सतगुरु होता ज्ञान है, सतगुरु को देह समझना भूल है अज्ञान है, संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में महात्मा शंकर भाषानी जी ने विचार व्यक्त किए
कटनी (मुरली पृथ्यानी ) हरदेव वाणी के शब्द से भी सतगुरु के दर्शन का जो महत्व है, वो बताया जा रहा है क्योंकि अध्यात्म में सतगुरु के दर्शन का बहुत बड़ा महत्व माना गया है बोला भी गया है कि गुरु बिन गत नहीं और शाह बिन पत नहीं। एक सतगुरु ही होता है जो हमें मानव जीवन के मूल उद्देश्य अर्थात आत्मा को परमात्मा से मिलाने का कार्य करता है और किसी के अंदर ये क्षमता नहीं होती है। हर एक वस्तु का, हर एक चीज का, हर एक विषय का कोई ना कोई प्रतीक हुआ करता है। जिस प्रकार से हम रोड पर जा रहे हैं और लाल बत्ती जलती है। इसका मतलब रुकने का संदेश है, हरी बत्ती जलती है, चलने का संदेश है। एरो बना होता है, उस तरफ मुड़ने का संकेत है, इसी प्रकार सतगुरु भी जो हुआ करता है, वो इस साकार ब्रह्म का प्रतीक होता है, ऐसा सब गुण साकार का प्रतीक होता है। निराकार है साकार तू जग के पालनहार। जो सतगुरु होता है, इस साकार का स्वरूप हुआ करता है। उक्त विचार संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में रविवार के सत्संग में हरदेववाणी के शब्द पर महात्मा शंकर भाषानी जी ने उपस्थित साध संगत के समक्ष व्यक्त किए। उन्होंने कहा जल में कुंभ है, कुंभ में जल ...