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Showing posts from July, 2026

जिन घरों में बहनों, बेटियों और माताओं का सत्कार होता है, वहाँ साक्षात लक्ष्मी का वास होता है, जहाँ संतों की कृपा दृष्टि होती है, वहाँ निरंकार स्वयं रक्षा करता है, संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में रविवार के सत्संग में महात्मा नोतनदास केवलानी जी ने विचार व्यक्त किए

कटनी (मुरली पृथ्यानी) वाणी के अंदर सतगुरु ने फरमाया है कि निरंकार प्रभु आप ही सबका पर्दा रखता है। कठिन समय, दुःख और मुसीबत के समय वह हमेशा हाथ देकर हमारी रक्षा करता है। ऐसा सुंदर संदेश हमें दिया गया है। हम सभी को अपने मन में झांक कर देखना चाहिए कि क्या हम वाकई 'निज' (सच्चे रूप में गुरु के) बन पाए हैं ? निज वही होता है जो सारी साध संगत से निश्छल प्यार करता है, सबका सत्कार करता है और सबका सम्मान करता है। वह कभी किसी संत के ऊपर क्रोध या गुस्सा नहीं करता। अगर कोई संत कुछ कह भी दे, तो वह सहन कर लेता है और प्रेम का व्यवहार बनाए रखता है। सब में निरंकार रूप विराजमान है। शहंशाह बाबा अवतार सिंह जी महाराज हमेशा कहा करते थे कि इस निरंकार को हमेशा अपने बीच में रखो और इसका एहसास हर पल अपने मन में बसा कर रखो। बाबा हरदेव सिंह जी महाराज हमेशा समझाते थे कि कोई भी बात करो, तो हमेशा सोच-समझ कर किया करो; ऐसा करने से कभी कोई गलती नहीं होगी। इंसान जब इस निरंकार प्रभु को भुला देता है, तब उसके मन में जो भी सांसारिक आवाजें या भाव आते हैं, वह उन्हें वैसे ही प्रकट कर देता है। अगर हम ऐसा करते हैं, तो हम गु...