हरि का दर्शन हमें सतगुरु ही करवाता है, हमेशा गुरु के दर्शन की प्यास बनी रहनी चाहिए, हम सतगुरु से भक्ति ही मांगा करें, संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में संयोजक महात्मा श्री राजकुमार हेमनानी जी ने विचार व्यक्त किये
कटनी ( मुरली पृथ्यानी ) आज गुरुपूर्णिमा का पर्व है आप सभी को लाख लाख बधाईयां। हरदेव वाणी में फरमान आ रहा है ज्ञान से भर जाने का मतलब है कि व्यक्ति मन से गदगद होता है। आंखों से खुशी भरे आंसू निकलते हैं सतगुरु के दर्शन करने से, सतगुरु का दर्शन अच्छे अच्छे कर नहीं पाते जो करते हैं उनका मन निर्मल हो जाता है मन खुशियों से भर जाता है आनन्द ही आनन्द हमेशा महसूस करते रहते हैं और गुरु के दर्शन करने से आत्मा भी हरि का दर्शन करती है, हमें जब सतगुरु का दर्शन होता है ज्ञान प्राप्त होता है हरि का दर्शन हमें सतगुरु ही करवाता है, हमेशा गुरु के दर्शन की प्यास बनी रहनी चाहिए। रात में सोयें तो सिमरन करके सोयें, शुक्र है दिन बीता है शुक्र है सुबह बीती है शुक्र है सांझ बीती है, यह गुरू के आगे अरदास करके सिमरन करना है। आप अपने जीवन में आनन्द से भरपूर रह सकते हैं, आनन्द का स्रोत है यह। उक्त विचार संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में रविवार गुरु पूर्णिमा के दिन सत्संग में संयोजक महात्मा श्री राजकुमार हेमनानी जी ने उपस्थित साध संगत के समक्ष व्यक्त किये।
उन्होंने कहा गुरू के दर्शन जन्म जन्म के सोये भाग जगाते हैं, गुरू के दर्शन आत्मा को हरि के संग मिलाते हैं। गुरु के दर्शन जन्म जन्म के पाप मिटाते हैं। हरि का दर्शन तो होता है आत्मा को परमात्मा का भी ज्ञान करवाते हैं। गुरु के दर्शन से मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं गुरु के दर्शन से भक्ति का सार मिल जाता है। मुक्ति के द्वार खुलने का मतलब यह है कि हम जो गुरु का दर्शन करते हैं, इस निरंकार का सुमिरन करते हैं, निरंकार का ज्ञान लेते हैं, उसमें हमें यह मुक्ति मिल जाती है, यह जीव को मुक्ति मिल जाती है जीते भी हम मुक्त हो जाते हैं और गुरु के दर्शन करने से हमें भक्ति का भी बहुत आनंद आता है, भक्ति मार्ग मिलता है हमेशा हम सतगुरु से भक्ति ही मांगा करें। यह विशेष कृपा की है सतगुरु माता जी ने कि आप संत के चरणों में नमस्कार करके अपने मन में भाव रखें, भाव से अपनी झोलियों को भर सकते हैं।
समय रहते सतगुरु की पहचान करो समय रहते ज्ञान प्राप्त करो, समय रहते सत्संग सेवा सुमिरन करते रहा करो समय रहते गुरमत पे चला करो सत्यवचनी बन के चला करो मनमत ना किया करो, मनमत से फिर हमारे कार्य बीच में अटक जाते हैं। जो आपका बीता समय है उस समय को देखिए पीछे समय को देखते हुए देखिए ज्ञान के बाद के समय को देखिए तो आप वारे न्यारे हुए हैं और धन्य धन्य हुए हैं। हमेशा एक को मानो एक को जानो और एक हो जाओ। हम संतों की हां में हां मिलाएं, एक दूसरे की बांह पकड़कर एक साथ जुड़े । महापुरुषों की परिभाषा कहां से आई ? लोग पूछेंगे, बात करेंगे, निरंकारी मिशन में वो सतगुरु माता जी की सिखलाई है, जो ज्ञान लेने के बाद आप महापुरुष हो जाते हैं, बहुत संत लोग आपस में मिलते भी हैं कि ये कौन महापुरुष हैं तो उनको आपको ये जानकारी देना है कि जब से हमने ज्ञान दिया है, तब से हमें महापुरुष की मोहर लग गई है। गुरू के दर्शन से जीवन के कट जाते हैं पाप सभी, गुरू के दर्शन से मिट जाते दुख संताप सभी। हर संत में गुरु के दर्शन करें, हर संत को अपनी अच्छी भावना से सत्कार रूप में देखें, सत्कार के रूप में प्यार से धन निरंकार किया करें।
हरदेव वाणी में हम लोगों के लिए लिखा है समझाया है कि कोई भाग्यवाला गुरू के दर्शन करता है कोई गुरू के बगल से निकल जाता है वो भाग्य हीन जो होता है जिसके भाग्य में कुछ नहीं लिखा है। वो गुरु के बगल से निकल जाता है तो भी दर्शन नहीं करता और ऐसे निकल जाता है जैसे जानता ही नहीं।
हरदेव वाणी की जो लाइनें आई, जो भी हमारे लिए वचन आए उस वचन पर चलेंगे और उन वचनों को अपने जीवन में ढालेंगे तो आगे वारे न्यारे होते जाएंगे। हमारे हित में होता है तो सतगुरु वो हमारा कार्य पूरा करता है। मिठी वाणी से मिठे मिठे बोल बोलते हुए चलना चाहिए, दास को भी ऐसा आशीर्वाद दीजिए कि आपके चरणों से जुड़ा रहे और जाने अन्जाने कभी कोई गलती भी हो जाती है, तो दास को क्षमा कर दें। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साध संगत की उपस्थिति रही।

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