बच्चों को खोजने दें शब्दों के अर्थ और देखिये अगले कुछ दिनों में बच्चे बच्चों से और स्वयं से बहुत कुछ सीखेंगे
कटनी। (डाइट शिक्षक राजेन्द्र असाटी की कलम से ) कृपया डिक्शनरी के प्रयोग को विद्यालयों में लागू करें। बच्चों को खोजने दें शब्दों के अर्थ और देखिये कि अगले कुछ दिनों में बच्चे बच्चों से और स्वयं से बहुत कुछ सीखेंगे।
🤝शिक्षक बनें सुविधादाता 🤝
साथियो कई बार हम पढ़ाते बहुत हैं पर बच्चे सीखते बहुत कम है,ऐसा होता क्यों है?
पिछले दिनों एक स्कूल जाना हुआ तो देखा कि हेडमास्टर की टेबल पर "Times Of India" News Paper रखा हुआ है तो थोड़ा सा आश्चर्य हुआ। उनसे पूछा तो एक नई बात सामने आई जो शायद हम सभी सीख सकते हैं और कर भी सकते हैं। एच एम मेडम ने कहा कि जब वे विद्यालय में आयी थी तो बच्चों में अंग्रेजी भाषा के प्रति रुचि उत्पन्न करना समस्या थी और सच कहूँ तो यह कुछ परम्परागत निबंध और एक या दो एप्लिकेशन रटकर उत्तीर्ण होने का विषय बन गई थी जबकि भाषा तो विचारों के सम्प्रेषण का माध्यम होती है पर यह उद्देश्य लगभग खो गया था। अंग्रेजी शिक्षक कॊ देखा तो वह कोई भी लेसन पढ़ाते तो पहले उसके कठिन शब्दों के अर्थ लिखवाते, लेसन का हिन्दी में अर्थ बताते, पाठ के पीछे लिखे प्रश्नो के उत्तर लिखवा देते और बच्चे इन्हें रटकर अगली कक्षा में चले जाते लेकिन सीखना अधूरा था। मन में एक असंतुष्टि रहती कि इसका क्या फायदा जब वे विषय की प्रकृति और उद्देश्य के साथ न्याय कर ही नहीं रहे?
इसको ध्यान में रखकर उन्होंने अपने अंग्रेजी विषय के शिक्षक से बात की और शुरू हुआ एक नया सिलसिला !.अब शिक्षक ने कक्षा में समूह बनाये हैं और हर समूह में कुछ बच्चे हैं जो Dictionary देखना जानते हैं। शिक्षक ने उस समूह के बच्चों कॊ लेसन के कठिन शब्दों के उच्चारण और अर्थ ढूंढ़ने कॊ कहा है।आश्चर्य का विषय है कि आज़ बच्चों के कठिन शब्दों की संख्या बढ़ गयी है क्योंकि हर बच्चे की अपनी कठिनाई है और उनके उच्चारण और अर्थ ढूंढना वे आपस में ही सीख गये हैं। छात्र शिक्षक के साथ उन शब्दों कॊ मिलाकर अर्थ भी बनाने का प्रयास करने लगे हैं। शिक्षक अब उन्हें पाठ के पीछे के प्रश्नो के उत्तर खुद खोजने कॊ कहते हैं और बच्चे उन क्रियाओं की ओर बढ़ चुके हैं जो उन्हें खुद के समाधान खोजने को प्रेरित करती हैं,जो हमारी कक्षाओं में सीखने सिखाने की प्रक्रियाओं कॊ मजबूत बनाती हैं।
अंग्रेजी के सरल निर्देशों का उपयोग भी शिक्षकों द्वारा कक्षा में किया जाने लगा है। किसी भी विषय के शिक्षक हों अब वे अपने पीरियड में कुछ शब्दों के अंग्रेजी शब्द बता देते हैं यानी विषयों की दीवार ढह गयी है,बच्चों और शिक्षकों का शब्दकोश भी बढ़ा है। बच्चे घर में भी कुछ नए शब्द सीखते हैं और वे इसके लिये शिक्षक पर निर्भर नहीं हैं क्योकि अब तो बच्चों ने घर में भी पापा से डिक्शनरी मँगा ली है,रुचि बढ़ने से ऐसा ही तो होता है।शब्दकोश बढ़ने से शब्दों का प्रवाह बढ़ गया है।
एक अभिनव प्रयास ने बच्चों, शिक्षकों और पालकों के सोचने की दिशा बदल दी है और अब कम प्रयासों से बच्चे ज्यादा सीख रहे हैं, निर्भर से आत्मनिर्भर हुए हैं। विद्यालय से घर आने के बाद याद आया राष्ट्रीय पाठयचर्चा प्रारूप(NCF) का कथन "बच्चों कॊ ज्ञान की बजाय ज्ञान सृजित करने के अवसर दें" जो शायद विद्यालय कर रहा था।अब मैं भी कक्षा में सुविधादाता (Facilitator) बनूंगा और कक्षा में ऐसा वातावरण दूंगा कि हम सभी एक दूसरे के अनुभवो से सीखेंगे।
क्या आपके विद्यालय भी बच्चों के साथ डिक्शनरी का उपयोग करते हैं? यदि नहीं तो आज़ ही वह दिन है जब आपको स्टार्ट करना है और हाँ जब आप कुछ नया करें और बच्चे सीखें तो अनुभव कॊ साझा जरूर कीजिए क्योकि शिक्षक एक व्यक्ति से ज्यादा विचार होता है और एक विचार ही तो चेतना का प्रसार कर परिवर्तन करता है।

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