संसार के लोगों मैंने पाया है आप भी पालो, मैंने देखा है आप भी देख लो... सुख कहीं नहीं मिलता सुख सतगुरु की शरणी, जे सुख सदा चाहें ते शरण राम की लें, संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में प्रचारक सुमन चावला जी ने विचार व्यक्त किए
कटनी (प्रबल सृष्टि) "तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय तुमको मैं कुमती।" आप ही तो प्रार्थना करते हो कि हे प्रभु, मुझे वो विधि बताओ किस विधि को अपना के मैं आपको प्राप्त करूँ।" वह गीत की बड़ी सुंदर लाइन आती है कि हमने देखा है प्रभु को देखा है कण-कण में हाज़िर हज़ूर। जिसने देखा, जिसने पाया, उन्होंने ही गाया। मीरा बाई ने क्या संदेश दिया? प्रभु श्री कृष्ण भगवान जी की मूर्ति लेकर चलते थे। प्रेम किया था प्रभु श्री कृष्ण भगवान जी से लेकिन कहीं ना कहीं अधूरापन था। ज्ञान के पहले क्या कहा संसार को? कि मैं प्रेम दीवानी, मेरा मरहम न जाने कोई। मैं प्रेम दीवानी हूं, मैं प्रेम तो करती हूं परमात्मा से, पर मेरे अंदर ये पीड़ा है, तकलीफ है, वो कोई नहीं जानता। मैं परमात्मा को पाना चाहती हूं। संपर्क हुआ फिर संत रविदास जी के चरणों में गए, नतमस्तक हुए। ज्ञान की प्राप्ति हुई तब संसार को क्या संदेश दिया? मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु कर कृपा अपनाओ। जब गुरु के शरण में गए, तब संसार को संदेश दिया कि संसार के लोगों, मैंने पाया है आप भी पालो, मैंने देखा है आप भी देख लो। उक्त विचार संत निरंकारी सत्संग भवन माधवनगर में रविवार के सत्संग में पवित्र हरदेववाणी के शब्द पर प्रचारक सुमन चावला जी ने उपस्थित साध संगत के समक्ष व्यक्त किए।
पावन हरदेव वाणी के शब्द सुनकर, एक मन में आनंद की अवस्था, निर्गुण, निराले, निरंकार। जब निरंकार का ज़िक्र आया तो ध्यान गया सतगुरु के चरणों में कि सचे पातशाह, आपने जो ये पावन ज्ञान हमारी झोली में बक्शा निरंकार दातार के दर्शन करवाए तो सारी सृष्टि की रचना निरंकार दातार ने की, दिखा दिया कि ये निरंकार है। चौगिर्द हमारे राम का दुख लगे ना भाई। हर घट मेरा साईंया सूनी सेज़ ना कोई। इस ज्ञान को पाने के लिए देवी-देवते भी तरसते हैं हम बड़े भाग्यवान हैं कि हमारे ऊपर सतगुरु ने तरस करके रहम करके ये अमूल्य दात बक्शी। इस ज्ञान की जब हम कदर करते हैं ज्ञान के अनुसार जब जीवन जीते हैं तब जीवन में आनंद आता है और ये आत्मा कहती है, शुक्र है। मुझे आनंद आ गया, परमात्मा आपकी कृपा से निरंकार दातार के दर्शन, दीदार हुए।
नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रैन। कैसे ये दिन रात चढ़ी रहेगी? जब ज्ञान समझ आता है, ज्ञान को रज-रज अमृत की तरह पिया जाता है। संपूर्ण हरदेव वाणी में फरमान आता है ज्ञान लेके ज्ञान का जिसने ना उपयोग किया और उसको लाभ मिला ना कोई, ना उसने आनंद लिया। इस ज्ञान को समझने के लिए हमें सबसे प्रेम करना पड़ता है। ऐ मन रख विश्वास प्रभु पे, नित्य आनंद मनाएगा पक्का है विश्वास अगर तो दुःख भी सुख बन जाएगा। जब एक-एक लाइन को गहराई से हम पढ़ते हैं तो हमारे जीवन में बदलाव आता है तभी हमारे जीवन में सुख, शांति आती है। सुख कहीं नहीं मिलता, सुख सतगुरु की शरणी, जे सुख सदा चाहें ते शरण राम की लें। इसके लिए ममतामयी निरंकारी राज माता जी ने बड़ी सुंदर युक्ति बताई कि इंसान तू हर एक में परमात्मा के दर्शन कर। जब हर एक में परमात्मा के दर्शन दीदार होंगे, तब आनंद जीवन में आएगा। ममतामयी निरंकारी राज माता जी कहते हैं कि हर गुरसिख में गुरू का रूप होता है। उस भक्त में, उस परमात्मा को देखे, दर्शन दीदार करे।
हम नित्य प्रतिदिन प्रार्थना में सुनते हैं "तेरा रूप है ये संसार" बख्शो श्रद्धा भक्ति प्यार, जब ये धुनी ये प्रार्थना हम करते हैं तो मगन हो जाए कि सामने मुझे कोई ना दिखे, सिर्फ ये परमात्मा सिर्फ ये निरंकार मुझे दिखे। तेरे दर पे आके सतगुरु, दुनिया का कुछ ध्यान नहीं रहता। नर है चाहे नारी है, ब्राह्मण क्षत्री वैश्य हरिजन, एक की ख़ल्क़त सारी है। प्रेम मेरे प्रभु को भाता है जब तक मेरे जीवन में प्रेम नहीं आता, तब तक मेरे हृदय में भक्ति नहीं पनपती, क्योंकि ये विराट वहाँ होते हैं जहां ये घट, पाकसाफ़ हो, पावन हो। इतनी पावन भक्ति हमें सतगुरु ने बख्शी है नित प्रतिदिन हमें संगतें बख्शी हम शुकराना करते चले जाएं। सत्संग कार्यक्रम में अनेक वक्ताओं ने भी गीत विचारों के माध्यम से अपने भाव प्रकट किए।

Comments
Post a Comment