पचेली बोली और संस्कृति के अध्ययन को लेकर पद्मश्री बाबूलाल दाहिया का कटनी प्रवास, स्लीमनाबाद में साहित्यकार डॉ. के.एल. हल्दकार से की चर्चा, आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां की संकलित
कटनी (प्रबल सृष्टि) लोक ज्ञान एवं विज्ञान के विशेषज्ञ पद्मश्री बाबूलाल दाहिया का पचेली बोली एवं उससे जुड़ी लोक संस्कृति के अध्ययन के सिलसिले में 24 अगस्त को कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र का प्रवास हुआ। इस दौरान वे अपने प्रपौत्र एवं सहयोगी अनुपम दाहिया के साथ पहुंचे। प्रवास के दौरान उन्होंने पचेली बोली, बघेली भाषा, ग्रामीण लोकजीवन, पारंपरिक कृषि ज्ञान तथा आदिवासी संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां संकलित कीं।पद्मश्री दाहिया ने स्लीमनाबाद स्थित आदर्श विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचकर संस्था के प्राचार्य एवं पचेली बोली के विद्वान डॉ. के.एल. हल्दकार से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच साहित्यिक एवं भाषायी चर्चा हुई। विशेष रूप से बघेली और पचेली बोली के अंतर्संबंध, उनके शब्दों, बोलचाल की शैली तथा ग्रामीण अंचल में इनके प्रचलन को लेकर विस्तृत विमर्श किया गया।
विद्यार्थियों को बताया देशी बीजों और जैविक खेती का महत्व
विद्यालय में पद्मश्री दाहिया ने शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए जैविक खेती तथा परंपरागत देशी बीजों के महत्व पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और देशी बीज हमारी ग्रामीण संस्कृति एवं कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।
उन्होंने विद्यालय स्टाफ एवं विद्यार्थियों को अपने गृह ग्राम पिथौराबाद आने का आमंत्रण भी दिया। विद्यार्थियों को वहां स्थित परंपरागत देशी बीजों की नर्सरी, बीज बैंक तथा भूले-बिसरे कृषि उपकरणों के संग्रहालय का शैक्षिक भ्रमण कराने की बात कही गई, ताकि नई पीढ़ी अपने पारंपरिक कृषि ज्ञान एवं ग्रामीण विरासत को करीब से समझ सके।
आदिवासी देवी-देवताओं और आह्वान मंत्रों पर हुआ संवाद
इसके बाद पद्मश्री बाबूलाल दाहिया, डॉ. के.एल. हल्दकार के साथ निकटवर्ती ग्राम छपरा निवासी जुगरू पंडा (जुगराज सिंह चौहान) के निवास पहुंचे। यहां आदिवासी समुदाय की लोक आस्था, देवी-देवताओं, उनके आह्वान मंत्रों, रीति-रिवाजों एवं पूजा पद्धतियों को लेकर विस्तृत और महत्वपूर्ण संवाद हुआ।
इस दौरान आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं एवं लोक मान्यताओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां संकलित की गईं। ग्रामीण समाज में पीढ़ियों से मौखिक रूप से चली आ रही ऐसी परंपराओं को दर्ज करना लोक संस्कृति के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पचेली बोली पर पुस्तक तैयार कर रहे पद्मश्री दाहिया
गौरतलब है कि पद्मश्री बाबूलाल दाहिया कटनी जिले के ग्रामीण अंचल में प्रचलित पचेली बोली और उससे जुड़ी लोक संस्कृति पर एक पुस्तक तैयार करने के कार्य में जुटे हैं। इसी क्रम में वे क्षेत्र के जानकारों, साहित्यकारों और ग्रामीणों से संवाद कर पचेली बोली के शब्दों, लोक प्रयोगों, परंपराओं एवं सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ी सामग्री संकलित कर रहे हैं। उनकी यह पुस्तक यथासमय प्रकाशित होगी। पद्मश्री दाहिया के प्रवास के दौरान आदर्श विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. के.एल. हल्दकार एवं विद्यालय स्टाफ द्वारा उनका स्वागत किया गया। प्रवास को पचेली बोली, लोक संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


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