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जिले की चारों विधानसभा सीटों पर जनता चुनेगी 17 नवंबर को अपना जनप्रतिनिधि

कटनी ( मुरली पृथ्यानी ) जनता के पास 5 साल बाद फिर विधानसभा चुनाव का मौका आया है मतदान करके वह अपना जनप्रतिनिधि चुनेगी और प्रदेश में सरकार बनाएगी। जब चुनाव आने लगते हैं तो राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए वादे करते हैं और जनता की पूछ परख बढ़ जाती है हाथ जोड़ उनके द्वार नेता पहुंचने लगते हैं।




                  इस बार प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के लिए बड़ी कसौटी है यह चुनाव वहीं कांग्रेस के लिए करो या मरो वाली स्थिति है। भाजपा जहां अपने 18 साल की सरकार के काम जनता के बीच में रख रही है तो कांग्रेस भी बड़े-बड़े वादे कर रही है। यह चुनाव स्थानीय स्तर पर होते हैं, जनता उसे चुनती है जो उनके सुख-दुख में साथ खड़ा होता है और विकास करता है। इस बार कटनी की चारों विधानसभा के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। भाजपा ने मुड़वारा सीट से विधायक संदीप जायसवाल पर फिर विश्वास जताया है तो कांग्रेस ने पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष मिथिलेश जैन को इस बार भी टिकट दिया है। आप पार्टी से सुनील मिश्रा अपना भाग्य आजमा रहें है निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व नगर निगम अध्यक्ष संतोष शुक्ला द्वारा मैदान में आना तय हुआ है।

विजयराघवगढ़ में भाजपा ने संजय पाठक पर ही भरोसा जताया है तो कांग्रेस से नीरज सिंह बघेल चुनाव लड़ रहे हैं, यहां भी मुख्य मुकाबला दोनों के बीच में ही है। बड़वारा में कांग्रेस प्रत्याशी बसंत सिंह का मुकाबला भाजपा के धीरेंद्र सिंह से है यहां भाजपा से पूर्व विधायक रहे मोती कश्यप निर्दलीय मैदान में हो सकते हैं। बहोरीबंद सीट पर भी मुकाबला दोनों प्रमुख पार्टियों का ही दिखाई पड़ रहा है यहां भाजपा से फिर प्रणय प्रभात पांडे मैदान में हैं तो कांग्रेस ने सौरभ सिंह को फिर मौका दिया है। चारों विधानसभा में अन्य और भी प्रत्याशी हैं जो जनता का भरोसा जीतने में लगे हैं, दोनों ही दलों से अन्य लोग भी दावेदार थे लेकिन जिन्हे टिकट नहीं मिली है वह ऐसे में अंदर ही अंदर क्या गुल खिलाते हैं यह चुनाव परिणाम बाद ही पता चलेगा।

                  अब जनता की बात उसे क्या मिलेगा ? उसे मिलेगी सरकार जिसमें रोज रोज फिर वह कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती अपने प्रतिनिधि पर कार्यों के लिए दबाव बना सकती है। ऐसे में इस चुनाव में जनता पर ज्यादा जिम्मेदारी है कि वह किसे जनप्रतिनिधि चुनती है जो सही मायने में उनकी सेवा करते हैं। मतदान ज्यादा से ज्यादा करवाने के लिए चुनाव आयोग के प्रतिनिधि भी खूब सक्रिय है। अब मौका है तो जनता ज्यादा से ज्यादा मतदान कर अपना भाग्य 5 साल के लिए सुरक्षित कर ले, यह चुनाव की बेला रोज रोज नहीं आती, जागरूकता, सोच विचार की ज्यादा आवश्यकता है आखिर लोकतंत्र का जो सवाल है।

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