निर्भीक होकर जीना ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि, बारडोली साहित्य उत्सव में कहानी एवं कविताओं का पाठ संपन्न
कटनी (प्रबल सृष्टि) आज के अवसर पर जब हम शहीदों का स्मरण करते हैं तब यह तथ्य उभरता है कि हमारी आजादी बड़ी मूल्यवान है, जिसे पाने के लिए देश ने बड़ी कीमत चुकाई हैं। आजादी की लड़ाई में बड़े बड़े लोग अपना राजप्रासाद छोड़ सड़क पर आम आदमी के साथ आकर खड़े हुए थे। ये लोग कुछ पाने के लिए नहीं, बल्कि समाज को कुछ देने के लिए लड़े थे। इस काल में जब बड़े बड़े राजघराने अंग्रेजों का चरण चुंबन करते हुए उनका साथ दे रहे थे, तब विजयराघवगढ़ राजा के साथ यहां के लोग अपने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए अंग्रेजों से लड़ रहे थे। किंतु आज ऐसा देखने को नहीं मिलता। आज के इस विभाजनकारी समय में जब लोग जाति - धर्म के नाम पर लड़ते हैं। होली, दिवाली, ईद पर लड़ते हैं, तब हमें याद करते हुए विस्मय होता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व सुदूर दक्षिण में जन्मे आदि शंकराचार्य ने कैसे वहां से पैदल चल कर एक प्रांत से दूसरे प्रांत को लांघते हुए हिमालय तक की यात्रा की और सारे देश को एक सूत्र में बांधा था। इसी कटनी में जन्मे रायबहादुर हीरालाल जी ने ब्रिटिश काल में अंग्रेज शासन की सेवा में रहते हुए इस आत्महीन प्रदेश के इतिहास, समाज, परंपरा, संस्कृति, पुरातत्व के गौरव को जिस शानदार ढंग से रेखांकित किया, उससे आज की पीढ़ी के प्रशासक प्रेरणा के सकते हैं कि कैसे अपने समय को चित्रित करना चाहिए। हमे अपने क्रांतिकारी बलिदानियों से प्रेरणा लेकर निर्भीक होना चाहिए, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उक्तशय के सारगर्भित विचार गत 23 मार्च शहीद दिवस पर स्थानीय ' प्रेम वाटिका ' ( भार्गव कंपाउंड ) में म . प्र .हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं भारतीय सांस्कृतिक निधि ( इंटैक ) कटनी इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ' बारडोली साहित्य उत्सव ' के प्रथम चरण की संगोष्ठी में वक्ताओं द्वारा व्यक्त किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लब्धप्रतिष्ठित कवि / निबंधकार अष्टभुजा शुक्ल ने की तथा मुख्य वक्ता पूर्व आई. ए. एस. एवं कवि / कथाकार राजीव शर्मा रहे।
कार्यक्रम के दूसरे चरण कहानी सत्र में वरिष्ठ लब्धप्रतिष्ठित कवि / कथाकार उदय प्रकाश, सुविख्यात कहानी / उपन्यासकार तरुण भटनागर एवं सुविख्यात कहानीकार विमल चंद पांडे द्वारा अपनी प्रतिनिधि कहानियों का पाठ किया गया। जिसका संचालन श्री अजय प्रताप सिंह बघेल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के तीसरे चरण में वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल ( बस्ती ), नवगीतकार राम निहोर तिवारी ( उमरिया ) लोकनाथ ( उमरिया ), विवेक चतुर्वेदी ( जबलपुर ), डा. दीपक जायसवाल ( दिल्ली ), विभूति तिवारी ( ब्यौहारी ) एवं इति शिवहरे ( दिल्ली ) द्वारा काव्य पाठ किया गया । इस सत्र का संचालन विवेक चतुर्वेदी द्वारा किया गया । कार्यक्रम की प्रस्तावना राजेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की एक विशेषता यह भी रही कि आयोजन का दिन सोमवार जैसा कार्यदिवस होने के बाद भी उल्लेखनीय संख्या में नगर के साहित्य प्रेमी प्रबुद्ध वर्ग की उपस्थिति कार्यक्रम समापन तक बनी रही। आयोजन स्थल पर जबलपुर से आए श्री अजय यादव द्वारा लगाया गया साहित्यिक पुस्तकों के विक्रय का स्टाल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
इस अवसर पर सर्वश्री सुशील शर्मा, डा. यशवंत वर्मा, डा. सुनीता वर्मा, डा. अमित कुमार साहू, डा. चित्रा प्रभात, निर्भय सिंह, मोहन नागवानी, के . एल . कनकने, अरविंद भार्गव, जुगल किशोर मिश्रा, मुकेश चंदेरिया, आशीष नामदेव , अनिल लालवानी, सुधीर सिंघानी, अनिल नेमा, राजेश बनवारी, विभव राम त्रिपाठी, मनोहर मनोज, राजा अवस्थी, रविन्द्र रवि, डा. ऊषा पांडे, पुष्पा गुप्ता प्रांजलि, मुकेश त्रिपाठी, डा. प्रद्युम्न मिश्रा, अनिल मिश्रा, गणेश राव, मनोज निगम, राजू रजक, सुभाष सिंह, अजय त्रिपाठी, ललन विश्वकर्मा, ईश्वरदास पुरवार, चंद्रकिशोर चंदन, विंदेश्वरी पटेल, सचिन शर्मा, ओंकार गौतम, मुरली पृथ्यानी, आलोक त्रिपाठी, डा. दिनेश बाटला, हरि सिंह भदौरिया, जितेंद्र सिंह, कमल श्रीचंदानी, कमलराज अग्रवाल, राधेश्याम बृजपुरिया, विजय बागरी, विष्णु बाजपेई, प्रो. अशोक श्रीवास्तव, डॉ सुशील खम्परिया आदि सैकड़ों प्रबुद्ध जनों सहित म. प्र. साहित्य सम्मेलन के उमरिया, शहडोल, अनूपपुर से पधारे अनेक रचनाकरों की उपस्थिति रही ।



Comments
Post a Comment