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अरबों खरबों साल से यह धरती अपनी धुरी पर घूम रही है कहीं कोई दिक्कत नहीं लेकिन दूसरी तरफ ...


( मुरली पृथ्यानी ) सूर्य चांद सितारों से दुनिया रोशन होती है जीवन का संचार होता आया है कहीं कोई दिक्कत नहीं।

कुदरत के बनाए पांच तत्वों से इंसान, जानवर, पंछी, कीट पतंग, जल जंतु आदि यह जीवन पातें हैं -जीते हैं कहीं कोई दिक्कत नही।

लेकिन आज इंसान को दिक्कत ही दिक्कत है कारण इंसान की ही कुटिलता, डेढ़ सयानापन। दूसरों को डराना, गैर जरूरी, गैर कानूनी, कुदरत के विपरीत अपनी कुत्सित बुध्दि का इस्तेमाल।

नतीजा वायरस का पैदा होना और पूरी दुनिया को दहशत में डाल निर्दोषों की जान जाना उसके बाद धर्म के नाम पर झगड़े फसाद। लेकिन शांति स्थायित्व की कोई बात नही जबकि हम पहले से खुद को विकसित होना बताते हैं नतीजा जगह जगह परेशान इंसान, मायूस इंसान, दुखी इंसान। हृदय को चीर देने वाले दृश्य।

इस पीड़ा को समझना होगा विचारना होगा, इसपर सजग होना होगा ताकि कभी फिर ऐसे दिन न आयें जिससे इंसानियत रो पड़े।

जुर्म किसी ने किया सजा सभी पा रहे।

जो हमे कुदरत ने दिया है बहुत दिया है बिल्कुल पूरा दिया है बस इंसान इंसान ही बना रहे।

इंसानों को जो काम करने मिला है बस ईमानदारी से और नेकी की भावना से करे।

तभी यह दुनिया रहेगी, लोग रहेंगे भाईचारा रहेगा, शांति रहेगी।



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