(मुरली पृथ्यानी) शहरी क्षेत्र में मजदूरी से जुड़े तमाम कार्य करने वाले अनेक लोग जब वापस अपने गांव जाते हैं तो कुछ मेरे समाचार पत्र कार्यालय के पास एकत्रित होते हैं, तब इकट्ठा ही गांव जाते हैं. इन दिनों चुनाव का माहौल है तो मैंने उनसे उनके गांव में चल रहे माहौल के बारे में बातचीत की, जैसे जैसे बातचीत आगे बढ़ी तो सब समझ में आने लगा कि आज भी चुनाव के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं हो पाई है. जिससे मैंने बातचीत की उसका मैंने जानबूझकर फोटो नहीं लिया बल्कि उसका पीछे से फोटो लिया. उसने बताया कि चुनाव के दौरान कई प्रत्याशी गांव के बाहर बाहर तो आते हैं, लेकिन अंदरूनी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते शायद इससे उनका समय बचता होगा. वह बताता है कि गांव के कुछ दलाल टाइप के लोग प्रत्याशियों को बता देते हैं कि यह इलाका मेरे कहने पर चलता है फलाना इलाका मेरे कहने पर चलता है. अगर प्रत्याशी नोट देने वालों में से हैं तो ऐसे दलालों को नोट दे देता है. हालांकि वह बताता है कि उन्हें जिसे वोट देना होता है उसे अपना वोट दे ही देते हैं लेकिन पैसा खर्च कर लोगों को अपने पक्ष में मतदान करने वाले आज भी मौजूद है इससे यही समझ में आता है. अब वजह आपको समझ में आ रही होगी कि क्यों मैंने उसकी तस्वीर सामने से नहीं खींची. दूसरी तरफ देखें तो चुनाव आयोग इसे लेकर काफी सख्त है लेकिन दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में वोट खरीदने वाले नहीं है इससे पूरी तरह इंकार भी नहीं किया जा सकता. मैं उसकी बातें सुनकर थोड़ा हैरान हुआ फिर मैंने उसके गांव की समस्याओं के बारे में बात करनी शुरू की, उसने बताया कि उनके आधे गांव में थ्री फेस और आधे में सिंगल फेस बिजली कनेक्शन है, अगर सिंगल फेस कनेक्शन बंद हो जाता है तो सुधार में काफी समय लग जाता है. बिजली के पोल लगे है लेकिन केबल नहीं है. पानी के विषय में भी कुछ यही हाल उसने बताया कि पाईप लाईन बिछी हुई है लेकिन उसमे पानी नहीं आया.अब जबकि चुनाव आ गए है और लोकतंत्र में सबका विश्वास कायम है तो यह हार्दिक इच्छा है कि क्यों कोई भी विकास से अछूता रहे. आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, देश-दुनिया में क्या हो रहा है इसकी अच्छी समझ रखते हैं, अच्छे भविष्य की उम्मीद करते हैं फिर अगर यह पता चले कि कहीं स्थितियां आज भी सुधार के लिए तरस रहीं है हालांकि इसमें धीरे धीरे ही सही लेकिन सुधार चालू है लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि साम-दाम-दंड-भेद चुनाव में होता है. कुल मिलाकर इतना साफ समझ में आ रहा है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए और चुनाव जैसे पवित्र अनुष्ठान को तमाम बुराइयों से दूर करने के लिए हर मतदाता को आगे बढ़ना होगा, अच्छी सोच समझ का प्रयोग करने का यही सही समय है . प्रदेश में जब 5 साल बाद अगले चुनावों हो और मैं ऐसे ही किसी ग्रामीण से बात करूं तो वह मुझे कहे कि सभी प्रत्याशियों ने अपनी बात कही है, कोई दलाल आकर किसी को वोट देने के लिए दबाव नहीं बनाते, कोई दारू नहीं बांटता अब सब सही है उस वक्त का मुझे इंतजार रहेगा.
कटनी जिले की चारों सिंधी सेंट्रल पंचायतों की संयुक्त महापंचायत के महत्वपूर्ण निर्णय 1 जनवरी 2026 से होंगे लागू, माधवनगर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र तीर्थानी ने सम्पूर्ण समाज जनों से सहयोग प्रदान करने अपील की, देखें वीडियो
कटनी ( प्रबल सृष्टि ) समाज में अनुशासन, मर्यादा और परंपराओं को बनाए रखने हेतु जिले की चारों सिंधी सेंट्रल पंचायतों की संयुक्त महापंचायत ने विगत 30 नवंबर को एक बैठक कुन्दनदास स्कूल शांतिनगर में आयोजित कर महत्वपूर्ण निर्णय पारित किए थे, जिसे समाज हित में 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा। इसे लेकर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत माधवनगर के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र तीर्थानी ने सम्पूर्ण समाज जनों से सहयोग प्रदान करने की अपील की है। समाज हित में पारित निर्णय - 1️⃣ बारात का आगमन: अधिकतम 3:00 बजे दोपहर तक अनिवार्य। 2️⃣ दूल्हे का प्रवेश: पैदल, निकट संबंधियों के साथ स्टेज पर। 3️⃣ दूल्हे के चारों ओर नृत्य: पूर्ण प्रतिबंधित। 4️⃣ पंचायती भोजन: केवल एक समय आयोजित। 5️⃣ बैंड-दल: केवल गेट तक; हॉल के अंदर प्रवेश निषिद्ध। 6️⃣ प्री-वेडिंग शूट: पूर्ण प्रतिबंध। 7️⃣ 13वीं का अवसर: सामूहिक या पंचायती भोजन पूर्णतः निषिद्ध, केवल निकट परिवार तक सीमित। 8️⃣ महिलाओं की पगड़ी-रसम: पुरुषों के समान नियम। 9️⃣ पगड़ी रसम में पंचायती भोजन एवं नाश्ता पूर्ण रूप से प्रतिबंध।

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